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सेना के शोर्य पर सियासत नहीं समर्थन चाहिए

रतलाम । भारतीय सेना ने पिछले दिनों लद्दाख की गलवान घाटी में जिस बहादुरी और वीरता के साथ चीनी सैनिकों को धूल चटाई है उसका उदाहरण आने वाले लम्बे समय तक दिया जावेगा निसंदेह उनकी बहादुरी और साहस ने प्रत्येक भारतीय का दिल जीता है उनके शौर्य की गाथा है । पड़ोसी मुल्कों में दहशत फैला रही है, चीनी सेना में हाहाकार मच गया है । लेकिन हमारे अपने देश में राजनीतिक व्यवस्था इतनी प्रतिद्वंदिता की आग में लिप्त है क्यो ? क्या इन्हें भारतीय सेना का मनोबल दिखाई नहीं दे रहा । दल और नेता अपने हित और अहित में अनर्गल बयानबाजी कर सेना के बलिदान को कम कर रहे हैं जो अनुचित है । इसी विषय को लेकर शिक्षक सांस्कृतिक संगठन ने ऑनलाईन साप्ताहिक परिचर्चा का आयोजन किया । जिसमें शहर के बुद्धिजीवियों शिक्षकों ने भाग लिया । भारतीय सेना ने पिछले दिनों लद्दाख की गलवान घाटी में जिस बहादुरी और वीरता के साथ चीनी सैनिकों को धूल चटाई है उसका उदाहरण आने वाले समय तक दिया जावेगा निसंदेह उनकी बहादुरी और साहस ने प्रत्येक विषय प्रवर्तन प्रस्तुत करते हुए प्रसिद्ध साहित्यकार मुरलीधर चांदीवाला ने कहा कि राजनैतिक मतभेद भुला कर भारतीय सेना का हौसला बढाना ही अब एक मात्र विकल्प है। जब-जब भी भारत के सामने चुनौतियाँ खड़ी हुईं, और उसे हानि उठानी पड़ी है, तो उसके मूल में कोई न कोई राजनैतिक मतभेद ही रहा है। तीन सौ साल पहले जब इस्ट इंडिया कम्पनी भारत आई, तब भी सत्ता के लिये दाँव-पेंच में उलझे हुए सामन्तों ने ब्रिटिश गवर्नमेंट को अपने देश में घुसने का रास्ता दिया। लम्बी गुलामी झेलने के बाद फिर वही हुआ। राजनैतिक खींचतान के चलते ही भारत के दो टुकड़े हुए। हमने इतिहास से कुछ भी सबक नहीं लिया। 1947 से ले कर अब तक का कालखंड भी दलगत राजनीत का शिकार रहा है। अभी हमारा देश कई मोर्चों पर युद्ध लड़ रहा है। चीन और पाकिस्तान के साथ अब नेपाल भी हमें आँखें दिखा रहा है। राजनैतिक दल अब उतने सक्रिय नहीं हैं, जितने दो दशक पहले हुआ करते थे। सीमा विवाद को लेकर चीन आक्रामक मुद्रा में है। सत्ता दल फूँक-फूँक कर चल रहा है। युद्ध कोई नहीं चाहता, लेकिन विपक्षी दल सत्तापक्ष का साथ देने की बजाय युद्ध के लिये उकसाने में लगा है। सत्तापक्ष भी व्यर्थ विवाद में उलझता रहता है। दो राजनैतिक दलों के परस्पर हमलों से जो संदेश दूर-दूर तक पहुँचता है, उससे देश की किरकिरी होती है। यह समय बहुत विकट है। राजनैतिक मतभेदों को अनदेखा कर सेना को ताकतवर बनाना, उसके भीतर आत्मविश्वास जगाये रखना बहुत आवश्यक है। यह समय सियासती उठापटक का कतई नहीं है। यदि सियासती बयानबाजियों और आरोप-प्रत्यारोपों का शीघ्र अंत नहीं हुआ, तो हमें बड़ी हानि उठानी पड़ सकती है। भारतीय सेना का हौसला बढाना ही एक मात्र विकल्प है, और इस पर हम सबको सावधानीपूर्वक बल देना चाहिए।
संस्था अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने कहा कि भारतीय सेना का शौर्य पूरी दुनिया में गूंजता है हमारी सेना का पराक्रम दुश्मन सेना के दांत खट्टे कर देता है बहादुरी का पर्याय है हमारी भारतीय सेना उसे शत-शत नमन । वरिष्ठ व्यंग्यकार कवि श्याम सुंदर भाटी ने कहा कि सैनिकों का बलिदान राजनीतिक लोगों के लिए सिर्फ बयानबाजी भर रह गया है सैनिकों की कुर्बानी नेताओं के बयानों से बहुत ऊपर है हमें हमारे सैनिकों पर भरोसा और विश्वास करना चाहिए । शिक्षक देवेंद्र वाघेला ने कहा कि हमारी भारतीय सेना आदर्शवादी सेना है मानवता से ओतप्रोत अपने कर्तव्य और देशभक्ति के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है। वरिष्ठ सेवानिवृत्त शिक्षक चंद्रकांत वाफगांवकर ने कहा कि हम आज चैन की नींद सो रहे हैं तो हमारे सैनिक भाइयों के त्याग और बलिदान के बल पर उन्हें भरपूर सम्मान और समर्थन मिलना चाहिए । सचिव दिलीप वर्मा ने कहा कि गलवान घाटी में छोटी सी टुकड़ी ने चीनियों के दांत खट्टे कर दिए हमारी सेना के साहस को कभी भूल नहीं पाएंगे । सेवानिवृत शिक्षिका भारती उपाध्याय ने कहा कि चीन हो या पाकिस्तान मुंह तोड़ जवाब देगा हिंदुस्तान। रक्षा के कुमार ने कहा कि हमारे भारतीय नेताओं को शर्म आना चाहिए जो हमारी सेना पर सवाल उठाते हैं सेना के त्याग और बलिदान को हमेशा मान सम्मान और इज्जत मिलना चाहिए । शिक्षक कमल सिंह राठौड़ ने कहा कि भारतीय सैनिकों का बलिदान भारत माता के प्रत्येक निवासी याद रखें। उनका बलिदान आने वाली कई पीढिय़ों तक याद रखा जाएगा भारतीय सैनिकों को नमन । शिक्षक रमेश परमार ने कहा कि चीनियों को समझ में आ गया है कि भारत 62 वाला भारत नहीं है भारत के वीर सेना से टकराना आसान नहीं है । परिचर्चा में क्षत्रिय वैभव के नरेंद्र सिंह पंवार, सेवानिवृत्त शिक्षक रमेश उपाध्याय, कविता सक्सेना ने भी भाग लिया । संचालन दिलीप वर्मा तथा आभार दिनेश शर्मा ने व्यक्त किया । परिचर्चा में नरेंद्र सिंह राठौर, वीणा छाजेड़, दशरथ जोशी, अंजुम खान, मदनलाल मेहरा, राजेंद्र सिंह राठौड़, बीके जोशी, मिथिलेश मिश्रा भी उपस्थित थे ।