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गीता अवसाद में भी विजय का शंखनाद है

रतलाम ।  गीता केवल एक पुस्तक भर नहीं है  भारतीय संस्कृति की गौरव गाथा का ग्रंथ है । जिसका प्रत्येक पन्ना संस्कृति की खुशबू के साथ अपना महत्व सदियों से प्रतिपादित करता आ रहा है जिसका एक एक शब्द सनातन सभ्यता का उद्घोष है यह अवसाद में भी विजय का शंखनाद करती है । उक्त विचार शिक्षक सांस्कृतिक संगठन द्वारा गीता जयंती के अवसर पर आयोजित ऑनलाइन परिचर्चा गीता का महत्व वर्तमान सामाजिक परिवेश में विषय पर वक्ताओं ने व्यक्त किए।
वरिष्ठ  साहित्यकार डॉ. मुरलीधर चांदनी वाला ने कहा कि गीता हमारे कर्म शास्त्र का जीवंत दस्तावेज है जिसका प्रत्येक अध्याय सनातन सभ्यता और संस्कृति का मूल मंत्र है जिस की पवित्रता में समूची मानव जाति अपना कर्म फल दर्शन करती है जीवन और मृत्यु का रहस्य गीता ने ही हमको समझाया है मानवीय मूल्यों का श्रेष्ठ वर्णन गीता के पवित्र अध्याय में समाहित है इसलिए इसका पठन-पाठन नियमित रूप से सभी को करना चाहिए।
नवीन कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती ममता अग्रवाल ने कहा कि गीता केवल पवित्र पुस्तक नहीं है वरन यह हमें जीवन जीने की प्रेरणा देती है इसका प्रत्येक अध्याय और वर्णित श्लोक सत्य का गुणगान है जीवन की सत्यता है जो पत्थर की लकीर के समान है।  ज्योतिष एवं वरिष्ठ शिक्षक पंडित राजेंद्र उपाध्याय ने कहा की भगवत गीता सनातन सभ्यता की गंगोत्री है जिस के अध्ययन से मानव के समूचे पाप कर्म अपने आप मिट जाते हैं इसकी पवित्रता की खुशबू हर घर में बसी हुई है यह रामायण की भांति ही हमारे आराध्य पुस्तक है ।  
संस्था अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने कहा कि गीता जैसे पवित्र ग्रंथ सांस्कृतिक धरोहर है यह सनातन धर्म की ध्वज पताका है गीता के उपदेश सिर्फ उपदेश नहीं है जीवन जीने के सफलतम सूत्र हैं जिन्हें अपनाकर हम हमारा जीवन सार्थक बना सकते हैं  । पूर्व अध्यक्ष कृष्ण चंद्र ठाकुर ने कहा कि जीवन और मृत्यु का उपदेश गीता से ही मिलता है कृष्ण और अर्जुन का वार्तालाप समूची गीता का सार है जो प्रत्येक सनातन वासी के लिए प्रेरक और अनुकरणीय है । संस्था सचिव दिलीप वर्मा ने कहा कि गीता की पवित्रता हमारे पति एक कर्मकांड ओं में परिलक्षित होती है इसका वाचन और श्रवण दोनों पवित्र संस्कार है। वरिष्ठ कवि और सेवानिवृत्त शिक्षक श्याम सुंदर भाटी ने कहा कि हम गीता के रहस्य को भूलते जा रहे हैं नई पीढ़ी को इसका जरा भी ज्ञान नहीं है हमें गीता के महत्व को नई पीढ़ी से परिचय कराना होगा ।
वरिष्ठ शिक्षक देवेंद्र वाघेला ने कहा कि गीता के 18 अध्याय समूची मानव सभ्यता के लिए उत्कृष्ट प्रमाण है जो मनुष्य के कर्म और कर्मों के फल से दर्शाता है भगवत गीता का वाचन हमें गौरव का अनुभव करवाता है । सेवानिवृत शिक्षिका भारती उपाध्याय ने कहा कि गीता का रहस्य केवल वही जानता है जो इसका नियमित वाचन करता है गीता पवित्रता का दूसरा नाम है । लायंस क्लब की झोन चेयर पर्सन तथा सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापिका वीणा छाजेड़ ने कहा कि गीता हमें कर्म करने के उपदेश देती है और हमारे कर्मों की पवित्रता हमारे आचरण के ऊपर निर्भर करती है इसलिए हमें अपने कर्मों की पवित्रता पर अधिक ध्यान देना होगा तभी गीता के मूल मंत्र के अनुरूप हम जीवन जी पाएंगे
रमेश उपाध्याय ने कहा कि पुरातन सभ्यता से लेकर वर्तमान समय तक गीता अपने उपदेशों के कारण पवित्रता का प्रतीक बनी हुई है । पूर्व अध्यक्ष राधेश्याम तोगड़े ने कहा कि भगवत गीता में वर्णित महाभारत की कथा विशेषकर अर्जुन और कृष्ण का वार्तालाप गीता का मूल सार है जो हमें कर्म करने की प्रेरणा देता है हमें कर्म प्रधान आचरण करना होगा तभी गीता के उपदेशों का पालन हो सकता है ।  कमल सिंह राठौड़ ने कहा कि गीता में वर्णित अध्याय और श्लोक आने वाली पीढ़ी को एक नई दिशा दे सकते हैं स्कूली पाठ्यक्रम में से जोड़कर उनका भविष्य कर्म में बनाया जा सकता है ।  वरिष्ठ शिक्षक दशरथ जोशी ने कहा कि गीता की पवित्रता किसी पवित्र नदी के समान है जिस में स्नान करने से हमारे आचरण हमारे संस्कार और हमारे कार्य शुद्धता धारण करते हैं । श्री बीके जोशी ने कहा कि गीता का प्रत्येक घर में होना ही इसकी पवित्रता को दर्शाता है यहां हमारे लिए किसी देवता से कम नहीं है।  गीता ऐसे कर्मशास्त्र के पन्ने खोलती है , जिसकी जड़ें ज्ञान से इस तरह सींची गई हैं कि कर्म हमें जीने की स्वतंत्रता देता है। वह हमें जकड़ता नहीं , मुक्त कर मूल्यवान् बनाता है। पराजित होने की आशंकाओं से बाहर खींच कर विजय व उल्लास के ऐसे समीरण में प्रवेश कराता है जहाँ भगवान् के प्रकाश में हमारी छबि भव्य और सुंदर हो जाती है।
परिचर्चा में पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र सिंह राठौड़ मिथिलेश मिश्रा मदन लाल मेहरा अनिल जोशी आरती त्रिवेदी रक्षा के कुमार रमेश चंद्र परमार मनोहर लाल जैन मनोहर प्रजापति कविता सक्सेना आदि उपस्थित थे संचालन दिलीप वर्मा तथा आभार देवेंद्र वाघेला ने व्यक्त किया ।

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