Uncategorized खेतिहर राज्य

विधायक श्रीमती पवार एवं कलेक्टर श्री शुक्ला के आतिथ्य में आलू फसल के प्रसंस्करण संबंधी प्रशिक्षण सम्पन्न

  • खेती को लाभ धंधा बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित की जा रही है योजनाएं-विधायक श्रीमती पवार
  • देवास जिला आलू उत्पादन के मामले में प्रदेश में दूसरे स्थान पर है- कलेक्टर श्री शुक्ला
  • करनावद में फुड प्रोसिंग का कलस्टर बनाकर आलू चिप्स बनाने की इकाई होगी शुरू, देवास जिले में किसानों द्वारा 9 हजार 981 हेक्टेयर एरिया में लगभग 01 लाख 97 हजार मैट्रिक टन आलू किया जाता है उत्पादित

देवास | विधायक श्रीमती गायत्रीराजे पवार एवं कलेक्टर श्री चंद्रमौली शुक्ला के मुख्य आतिथ्य में राज्य पेाषित योजना अंतर्गत आलू फसल के प्रसंस्करण संबंधी कृषक प्रशिक्षण आज सृष्टि होटल देवास में सम्पन्न हुआ। प्रशिक्षण में 250 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण में उपसंचालक उद्यानिकी श्री नीरज सांवलिया, खाद्य प्रसंस्करण के सलाहकार श्री रामनाथ सूर्यवंशी, श्री शैलेंद्र भाटी, श्री फूलसिंह चावड़ा तथा बड़ी संख्या में कृषकगण उपस्थित थे।
कार्यक्रम में विधायक श्रीमती पवार ने संबोधित करते हुए कहा कि देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान द्वारा खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही है। इन योजनाओं से किसानों की आर्थिक स्थिति और मजबूत बनेंगी। उन्होंने कहा कि मैं स्वयं भी किसान हूं। इसलिए मैं भी किसानों की पीढ़ा को समझती हूं। उन्होंने कहा कि आप सभी किसान खेती में प्रसंस्करण की विधि को अपनाए। इसके लिए आप अपनी आलू की उपज को सीधे खेत से मंडी में बेचते हुए प्रसंस्करण कर आलू के उत्पाद जैसे आलू चिप्स, फ्राइस, डिहाइट्रेट, पावडर आदि बनाकर बाजार में बेचे। जिससे आपको अच्छी आय प्राप्त हो सके।
प्रशिक्षण में कलेक्टर श्री शुक्ला ने कहा कि देवास जिला आलू उत्पादन में प्रदेश में दूसरे नंबर है। देवास जिले में किसानों द्वारा 9 हजार 981 हेक्टेयर एरिया में लगभग 01 लाख 97 हजार मैट्रिक टन आलू उत्पादित किया जाता है। कलेक्टर श्री शुक्ला ने बताया कि देवास जिले के बागली अनुभाग के करनावद में फुड प्रोसिंग का कलस्टर बनाकर आलू चिप्स बनाने की इकाई शुरू की जा रही है। जिससे किसानों की आय दोगुनी होगी। उन्होंने कहा कि जिले के कृषक आलू उत्पादन कर सीधे मंडी में बेचते हैं, जिससे उन्हें अच्छे दाम प्राप्त नहीं होते हैं। अत: आप सभी कृषक आलू का उत्पादन करने के साथ उनका प्रसंस्करण करें, जिससे अच्छी आय हो सके। उन्होंने कहा कि आप यहां से जाने के पश्चात इस दिशा में अच्छे से कार्य करना प्रारंभ कर दे और अच्छी आय को अर्जित करे।
प्रशिक्षण में खाद्य प्रसंस्करण के सलाहकार श्री रामनाथ सूर्यवंशी ने फुड प्रंसस्करण उत्पाद की पैकेजिंग एफएसएसएआई पंजीयन की मार्केटिंग एवं निर्यात के संबध में जानकारी दी। श्री शैलेंद्र भाटी ने उद्योग स्थापना एवं उसके क्रियान्वयन के संबंध में जानकारी दी तथा अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने आलू से ग्रीस तैयार करने के संबंध में भी जानकारी दी।
उपसंचालक उद्यानिकी ने प्रशिक्षण के बारे में विस्तार जानकारी दी तथा कहा कि किसानों को उद्यानिकी फसलों को भी उत्पादित करना चाहिए। इसके लिए शासन द्वारा कई योजनाएं संचालित की जा रही है। उन्होंने कहा कि आलू एक महत्वपूर्ण फसल है, इसका उपयोग चिप्स, हलवा एवं अन्य व्यंजन बनाने में किया जाता है। साथ ही प्राय: सभी सब्जियों में इसका उपयोग किया जाता है। इसका औसतन उत्पादन 110 क्विंटल प्रति हेक्टयेर होता है। सतपुड़ा पठारी क्षेत्रों में इसकी खेती लगभग 3 हेक्टेयर भूमि में की जाती है एवं इसका औसतन उत्पादन 160 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। आलू की फसल साल में तीन बार लगाई जाती है। प्रशिक्षण में देवास जिले के बागली अनुभाग के करनावद के किसान मनोहरलाल पाटीदार ने भी अपने अनुभव साझा किए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *