रतलाम

युवा दिवस विवेकानंद जयंती पर शिक्षक सांस्कृतिक मंच द्वारा पुष्पांजलि अर्पित

रतलाम। बालक अपने भविष्य के सपने देखता है वृद्ध अपने अतीत का स्मरण कर प्रसन्न होता है लेकिन देश का युवा अपने पुरुषार्थ के बल पर वर्तमान का सृजन कर उसका निर्माण करता है यही शिक्षा और उपदेश स्वामी विवेकानंद ने अपने छोटे से जीवन काल में पूरे विश्व के युवाओं को प्रदान की थी और उनका यह विचार समूचे विश्व के युवाओं की पहचान बन गया । हम अत्यंत गौरवशाली और भाग्यशाली है कि हमें स्वामी विवेकानंद की जन्म भूमि भारतवर्ष पर जन्म लेने का सौभाग्य मिला।
उक्त विचार आध्यात्मिक क्रांति के प्रणेता भारत ही नहीं केवल अपितु संपूर्ण विश्व में सनातन धर्म पताका का जयघोष करने वाले प्रखर संत शिरोमणि स्वामी विवेकानंद की जयंती 12 जनवरी के अवसर पर कॉमर्स कॉलेज स्थित स्वामी जी की आदम कद मूर्ति पर शिक्षक सांस्कृतिक संगठन द्वारा माल्यार्पण करते हुए शिक्षकों के बीच प्रखर साहित्यकार डॉक्टर मुरलीधर चांदनी वाला ने व्यक्त किए।
मंच द्वारा आयोजित परिचर्चा को संबोधित करते हुए डॉ. चांदनी वाला ने कहा कि स्वामी जी का संपूर्ण जीवन काल प्रेरणा और चुनौतियों का मिश्रण है जो प्रत्येक मनुष्य को भूत भविष्य और वर्तमान का निर्माण करने की प्रेरणा देता है । आपने कहा कि स्वामी जी ईश्वर से अधिक मानवता के पुजारी थे दिखावा और आडंबर से मुक्त उनके धर्म उपदेश आज भी प्रासंगिक हैं वह सदियों तक पूरे विश्व में पूजे जाते रहेंगे उन्होंने पूरी दुनिया में भारत और भारतीय लोगों का सम्मान बढ़ाया था।
प्रख्यात शिक्षाविद पूर्व प्राचार्य ओपी मिश्रा ने कहा कि स्वामी जी ने सनातन धर्म की रूढिय़ों और अंधविश्वासों को दरकिनार करते हुए ईश्वर की भक्ति को मानव सेवा से जुड़ा था आपने कहा कि उनमें देवी शक्ति विद्यमान थी जो उन्हें अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस से प्राप्त हुई थी उनकी दिव्यता और भव्यता उनका तेज अद्वितीय था उनके प्रवचन और तर्क अकाट्य थे उनकी उपस्थिति और ऐतिहासिक भाषण से शिकागो का धर्म सम्मेलन सफल हो पाया था वे सच्चे भारतीय संस्कृति के पुरोधा थे ।
पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. सुलोचना शर्मा ने कहा कि उन्होंने युवाओं को जागृत करने के लिए क्रांतिकारी विचार प्रदान किए जागो उठो और लक्ष्य को प्राप्त करो यही पुरुषार्थ की पहचान है। पूर्व प्राचार्य गोपाल जोशी ने कहा कि हम भारत में स्वामी जी को घर-घर में देखना चाहते हैं उनके विचार और संस्कारों को विद्यालय पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए आने वाली पीढ़ी ऐसे महापुरुषों के दिए गए ज्ञान से लाभान्वित हो सके।
सस्ता अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने कहा कि शिक्षकों का दायित्व है कि वे स्वामी जी के जीवन को आत्मसात करने की कोशिश करें यदि शिक्षक गण स्वयं उनके आदर्शों पर चलते हुए आने वाली ऐसी पीढ़ी तैयार करें जिस पर पूरे भारत ही नहीं अपितु विश्व को घर बा हो तभी स्वामी जी के सपनों का भारत बन पाएगा उनकी दी हुई शिक्षा सार्थक हो पाएगी।
श्रीमती वीणा छाजेड़ ने कहा कि स्वामी जी का पूरा जीवन भारतीय संस्कृति और धर्म ज्ञान को विश्व में स्थापित करने के लिए समर्पित रहा हम सब भारतीयों का मान उन्होंने बढ़ाया । पूर्व अध्यक्ष कृष्ण चंद्र ठाकुर ने कहा कि स्वामी जी ने सदैव कर्म करने की प्रेरणा दी कर्मवीर व्यक्ति सदैव पूजनीय और समाज में आदर्श बनकर प्रतिष्ठित रहता है स्वामी जी की शिक्षा दीक्षा खासकर युवाओं के लिए बेहद आवश्यक है । राधेश्याम तोगड़े ने कहा कि हम स्वामी जी को आदर्श महापुरुष के रूप में मानते हैं उनकी जीवन गाथा प्रेरणा और आदर्शों का महा ग्रंथ है जिसका एक एक प्रश्न भारतीय धर्म संस्कृति का संदेश देता है । नरेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि स्वामी जी मैं सदैव मनुष्यता की सेवा करने की प्रेरणा दी उन्होंने धार्मिक पाखंड उसे हमेशा दूरी बनाकर रखी उनकी मान्यताओं ने उन्हें विश्व गुरु की पदवी दिलवाई।
देवेंद्र वाघेला ने स्वामी जी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि धर्म संस्कृति और ज्ञान के प्रति उनका जो दृष्टिकोण था वह सदैव अनुकरणीय रहेगा । श्याम सुंदर भाटी ने कहा कि स्वामी जी हमारे देश के संत शिरोमणि थे उन्होंने भारतीय आध्यात्मिक संत परंपराओं को पूरे विश्व में सम्मान दिलवाया उन जैसा संत आज तक ना कोई हुआ है ना कभी होगा । रमेश उपाध्याय ने कहा कि स्वामी जी को पूरा विश्व अपना गुरु मानता है जहां जहां भी स्वामी जी गए वहां उन्होंने अपने अनुयायियों की फौज तैयार कर ली यही उनके व्यक्तित्व की पहचान थी। कविता सक्सेना ने कहा कि स्वामी जी का जीवन प्रत्येक भारतीय के लिए किसी धार्मिक ग्रंथ के समान है जिसके स्मरण मात्र से हमें पुण्य और पवित्रता का एहसास होता है
रक्षा के कुमार ने कहा कि स्वामी जी ने जो आदर्श अपने दिए लागू किए थे वही मैं लोगों में भी देखना चाहते थे उनके आदर्शों को आत्मसात करना उनके प्रति सच्ची सेवा और निष्ठा होगी । आरती त्रिवेदी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के बल संत शिरोमणि नहीं थे अपितु मानव सभ्यता के प्रतीक थे उनका विराट व्यक्तित्व किसी देवता के तुल्य था उनका स्मरण मात्र हमें प्रेरणा से भर देता है ।
मदनलाल मेहरा ने कहा कि स्वामी विवेकानंद युवा पीढ़ी के लिए एक आदर्श और प्रेरक व्यक्तित्व के रूप में विद्यमान है उनके विचार सदैव प्रेरणा देते रहेंगे शिक्षक समुदाय को आने वाली पीढ़ी को उनके विचारों से परिचित कराने का दायित्व उठाना चाहिए। दशरथ जोशी ने कहा कि स्वामी जी का संपूर्ण जीवन और उनके दृष्टांत युगो तक पढ़े जाएंगे उनकी दी हुई शिक्षा पूरे समाज के लिए और देश के लिए उत्तम ता का प्रतीक है । रमेश परमार ने कहा कि वे दुनिया के एकमात्र ऐसे संत थे जिन्होंने धर्म को व्यवसाय की अपेक्षा मानव जीवन के उद्धार का माध्यम बनाया ऐसे संत शिरोमणि का स्मरण सदियों तक होता रहेगा । संस्था के सचिव दिलीप वर्मा ने कहा कि हम स्वामी जी के आदर्श मार्गों पर चलने का संकल्प लेकर अपने विद्यालय जाएं और आने वाली पीढ़ी को स्वामी जी के व्यक्तित्व से परिचित कराएं
श्री चंद्रकांत वाफगांवकर ने कहा कि हां युवाओं को स्वामी जी से प्रेरणा लेकर अपना जीवन व्यतीत करना चाहिए उनके पुरुषार्थ और धर्म निष्ठा के प्रति भारतीय संस्कृति को और जागृत करना होगा यही स्वामी जी के प्रति सच्ची श्रद्धा होगी । कार्यक्रम का संचालन सचिव दिलीप वर्मा तथा आभार श्याम सुंदर भाटी ने व्यक्त किया ।

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