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प्याज का भण्डार गृह बनवाकर रघुराज सिंह ने अपनी आय दुगुनी की (खुशियों की दास्ताँ)

खण्डवा | पंधाना विकासखण्ड के ग्राम घाटाखेड़ी निवासी रघुराज सिंह पिता लक्ष्मण सिंह पिछले कुछ वर्षो से अपनी 17 एकड़ कृषि भूमि में से लगभग 8 एकड़ में प्याज का उत्पादन करते है। पूर्व के वर्षो में प्याज उत्पादन होते ही उसे बाजार में चालू मूल्य पर ही बेचना पड़ता था चाहे प्याज का भाव बाजार में कम ही हो, क्योंकि इतनी प्याज रखने के लिए उनके पास जगह नही थी और प्याज खराब होने का डर लगा रहता था। ऐसा करने में प्याज का मूल्य ठीक नही मिल पाता था। कभी कभी तो लागत भी निकालना मुश्किल था।
रघुराज सिंह ने बताया कि गत वर्ष जब प्याज की फसल तैयार हुई तो बाजार में भाव 7 रूपये किलो था, यदि वह इस भाव पर अपनी प्याज बेचता तो केवल 3.50 लाख रूपये में उसकी प्याज बिकती, लेकिन उद्यानिकी विभाग की मदद से जो प्याज भण्डार गृह उसने बनवा लिया था। अब चूंकि भण्डार गृह बन गया तो प्याज रखने के लिए रघुराज सिंह के पास सुरक्षित जगह हो गई, इसलिए उसने अप्रैल में न बेचकर अपनी प्याज अगस्त माह में बेची, क्योंकि अगस्त में प्याज का भाव 7 रूपये किलो से बढ़कर लगभग 20 रूपये किलो हो गया था, ऐसे में उसने मौके का फायदा उठाया और लगभग 8 लाख रूपये की प्याज बाजार में बेच दी। रघुराज सिंह ने बताया कि गोदाम के अभाव में उसे प्याज सस्ते में बेचना पड़ती थी। गोदाम बन जाने से उसकी आय बढ़कर दुगुनी से भी अधिक हो गई है। उसने बताया कि सरकार ने 50 टन क्षमता का प्याज भण्डार गृह बनवाने पर लगभग 3.50 लाख रूपये का खर्चा आया, जिसमें से 50 प्रतिशत राशि अर्थात 1.75 लाख रूपये उसे अनुदान के रूप में मिल गई। प्याज बेचकर आय बढ़ने से रघुराज सिंह व उसका परिवार अब बहुत खुश है।

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