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स्वयं को मृत दिखाने के लिए फर्जी दस्तावेज बनवाने वाले आरोपी बंशीलाल गुर्जर को 07 वर्ष का सश्रम कारावास

नीमच। श्रीमान हृदेश, सत्र न्यायाधीश, नीमच द्वारा स्वयं की मृत दिखाकर पहचान छुपाने के लिए फर्जी दस्तावेजों को बनवाने वाले आरोपी बंशीलाल उर्फ शिवा पिता रामलाल गुर्जर, उम्र-32 वर्ष, निवासी ग्राम नलवा, थाना कुकडेश्वर, जिला नीमच को भादवि की विभिन्न धाराओं में 07-07 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 1,000-1,000रू. जुर्माने से दण्डित किया।
घटना का विवरण – लोक अभियोजक श्री मनीष जोशी द्वारा घटना की जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2009 में पुलिस से हुई मुठभेड़ से हुए एनकाउण्टर में आरोपी बंशीलाल गुर्जर का मृत होना दिखाया गया था, किंतु जनचर्चा यह थी कि बंशीलाल का एनकाउण्टर फर्जी था। इसी परिपे्रक्ष्य में एक अन्य अपराध में आरोपी घनश्याम धाकड़ को दिनांक 25.09.2011 को गिरफ्तार किया था, जिसने पुलिस को बताया था कि वह फरारी के दौरान आरोपी बंशीलाल गुर्जर के यहाँ था। इस प्रकार घनश्याम धाकड़ द्वारा दी गई जानकारी एवं जनचर्चा के आधार पर आरोपी बंशीलाल गुर्जर के जीवित होने के प्रमाण मिले। जिसके बाद दिनांक 20.11.2011 को दानीगेट के पास, उज्जैन से आरोपी बंशीलाल गुर्जर को गिरफ्तार किया गया, जिसकी तलाशी लेने पर उसके पास उसका फोटो लगा ड्राईविंग लाईसेंस व वोटर आई.डी. कार्ड मिला, जिसमें नाम शिवा गुर्जर का लिखा था। आरोपी के विरूद्ध पुलिस थाना नीमच केंट में अपराध क्रमांक 631/12, धारा 419, 420, 468/471 भादवि का पंजीबद्ध किया गया। संपूर्ण विवेचना में यह पाया गया कि आरोपी बंशी गुर्जर द्वारा स्वयं को मृत दिखाने केे लिए उसके द्वारा कूटरचना कर फर्जी दस्तावेज शिवा गुर्जर के नाम से बनाये गये। अपराध की संपूर्ण विवेचना पूर्ण कर अभियोग-पत्र माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
अभियोजन द्वारा माननीय न्यायालय के समक्ष विचारण के दौरान महत्वपूर्ण साक्षीगण के बयान न्यायालय में कराते हुए आरोपी द्वारा स्वयं को मृत बताकर अपनी पहचान छुपाने के लिए फर्जी दस्तावेज बनाये जाने के अपराध को प्रमाणित कराया गया एवं आरोपी को कठोर दण्ड से दण्डित किये जाने का निवेदन किया गया, जिस पर से माननीय न्यायालय द्वारा आरोपी को धारा 420 भादवि में 07 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 1,000रू. जुर्माना, धारा 468/471 भादवि में 07 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 1,000रू. जुर्माना तथा धारा 419 भादवि में 03 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 500रू. जुर्माना से दण्डित किया। न्यायालय में शासन की ओर से पैरवी लोक अभियोजक, श्री मनीष जोशी द्वारा की गई।

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