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नौकरी लगवाने के नाम पर रूपये लेकर धोखाधड़ी करने वाले आरोपी को 03 वर्ष का सश्रम कारावास

नीमच। श्री महेश कुमार त्रिपाठी, न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी, नीमच द्वारा नौकरी लगवाने के नाम पर रूपये लेकर धोखाधड़ी करने वाले आरोपी सुनिल पिता नारायण नागदा, उम्र-29 वर्ष, ग्राम उचेड़ा, थाना-मनासा, जिला- नीमच को धारा 420 भादवि के अंतर्गत 03 वर्ष के कठोर कारावास व 1000रू. जुर्माने से दण्डित किया।
श्री आकाश यादव, एडीपीओ द्वारा जानकारी देते हुुए बताया कि फरियादी भगवती प्रसाद के मामा ससुर का पोता आरोपी सुनिल हैं, जिस कारण उसका फरियादी के घर आना-जाना लगा रहता था। आरोपी लाफार्ज फैक्ट्री, निम्बाहेड़ा (राजस्थान) में नौकरी करता था, जिस कारण उसने फरियादी से कहा की वह उसकी भी नौकरी उक्त फैक्ट्री लगवा देगा किन्तु उसके लिए 40000रू पहले व 40000रू नौकरी लगने के बाद देना होगा, यदि नौकरी वह नहीं लगवा पाया तो रूपये ब्याज सहित उसे लौटा देगा। इस प्रकार आरोपी द्वारा फरियादी को उत्प्रेरित कर दिनांक 15.10.2014 को उससे फरियादी से 2000रू फार्म भरने के व 40000रू नौकरी लगवाने के नाम पर ले लिये और कहा की वह 3 महीने के भीतर नौकरी लगवा देगा। फरियादी द्वारा लगभग 10 माह इंतजार करने के पश्चात् भी आरोपी द्वारा उसकी नौकरी नहीं लगवाई गई, इसके बाद फरियादी द्वारा आरोपी से रूपये वापस मांगे जाने पर आरोपी द्वारा टाल-मटोल करते हुए रूपये देने से इंकार कर दिया। जिस कारण फरियादी द्वारा आरोपी के विरूद्ध दिये गये शिकायती आवेदन के आधार पर पुलिस थाना नीमच सिटी में अपराध क्रमांक 367/15, धारा 420 भादवि में पंजीबद्ध किया गया। विवेचना उपरांत अभियोग पत्र माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
श्री आकाश यादव, एडीपीओ द्वारा विचारण के दौरान फरियादी सहित सभी महत्वपूर्ण साक्षीगण के बयान कराकर आरोपी के विरूद्ध नौकरी लगवाने के नाम पर रूपये लेकर धोखाधड़ी के अपराध को प्रमाणित कराकर उसे कठोर दण्ड से दण्डित किये जाने का निवेदन किया। माननीय न्यायालय द्वारा यह कहते हुए की इस घटना में आरोपी द्वारा अपराध उस समय कारित किया गया जब फरियादी का उसके ऊपर पूर्ण विश्वास था, अतः ऐसे अपराध को सभ्य समाज की समाजिक व्यवस्था की चुनौती देने के समान मानते हुए आरोपी सुनिल को 03 वर्ष के कठोर कारावास व 1000रू. जुर्माने से दण्डित किया। न्यायालय में शासन की ओर से पैरवी श्री आकाश यादव, एडीपीओ एवं अंतिम बहस श्री राजेन्द्र नायक, एडीपीओ द्वारा की गई।

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