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आज भी पानी को अनाप-शनाप बहाया जा रहा है उसे रोकने में जन जन का सहयोग जरूरी है

जावरा (अभय सुराणा ) । आदमी में जब तक डर नहीं होगा वह पानी का अपव्यय करता रहेगा । पानी की बचत करने के जनजागरण आवश्यक है । आज भी पानी को अनाप-शनाप बहाया जा रहा है उसे रोकने में जन जन का सहयोग जरूरी है ।आने वाले समय में पानी की स्थिति विकट होने वाली है इस पर अभी से ध्यान नहीं दिया तो भविष्य में पानी के लिए पछताना पड़ेगा। यह बात अध्यक्षता कर रहे श्री जगदीश उपमन्यू ने अटल ग्राम सामाजिक विकास संगठन जावरा द्वारा आयोजित विश्व जल दिवस के अवसर पर अनुभव कथन जल बचाने में मेरी भूमिका पर अन्नक्षेत्र के नवीन हाल रावण द्वार पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम के प्रारंभ में मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण जगदीश उपमन्यु एवं श्रीमती चारूश्रोत्रिय , संस्थापक अध्यक्ष कोठारी, रमेश मनोहरा, मनोहर सिंह चौहान मधुकर ने किया। सरस्वती वंदना श्री रतन लाल जी उपाध्याय ने प्रस्तुत की । अतिथियों का स्वागत राजेन्द्र सिंह सिसोदिया ,अमन सिसोदिया ने किया ।कार्यक्रम की विशेष अतिथि श्रीमती चारु श्रोत्रिय ने कहां की पहले जमाने में पानी के साधन तालाब, बावडिया होते थे मगर आज जल संसाधन बदल गए । उन्होंने अपनी एक कविता मालवी भाषा में प्रस्तुत की जिसमें जल बचाने पर प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम में श्री अशोक पोरवाल ने कहा जल संग्रहण से ही जल बचाया जा सकता है। संस्थापक अध्यक्ष श्री अभय कोठारी ने कहा पानी व्यर्थ नहीं बहाना चाहिए यदि बहता है तो उसे रोकने के प्रयास करना चाहिए ।इसी तरह ओमप्रकाश शिकारी ने जल पर कविता पढ़कर बचत करने की प्रेरणा दी ।राजेंद्र त्रिवेदी ने जल बचाने की आवश्यकता क्यों पड़ी इसे कैसे बचाया जाए इस पर विचार करना चाहिए ।श्री रतन लाल जी उपाध्याय जल है जीवन से जाना अटल ग्राम का नारा हे कविता सुनाई । अब तक हमने जल का बहुत दुरुपयोग किया है यह बात मुन्ना भाई पेंटर ने कहीं इसी का परिणाम है कि आज हम गर्मी में पानी के लिए तरसते हैं ।श्री कुलकर्णी ने पेड़ों के महत्व बताते हुए कहा आज पानी की समस्या है उस का प्रमुख कारण अपने स्वार्थ के कारण पेड़ों की अंधा धुंध कटाई है ।विनोद अग्रवाल ने भी पानी की बचत पर जोर दिया।श्री रमेश मनोहरा ने आने जिन नलों में तो लाईनें लगी रहती थी और व्यर्थ का पानी बहता था तब प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य होता था टोटी बंद करें। श्री मनोहर सिंह चौहान मधुकर ने मत कर पानी को बेकार जल बहुत जरूरी है गीत सुना कर वातावरण को रसमई बना दिया ।अंत में भारत सरकार के जलमिशन द्वारा जारी जलशपथ उपस्थित सभी सदस्यों को संस्थापक अभय कोठारी ने दिलाई ।इस अवसर पर जल बचाने मेरी भुमिका को लेकर धर धर जाने जाने का संकल्प लिया।साथ ही जलमित्र समाचार के नवीन अंक का विमोचन भी किया गया ।कार्यक्रम का संचालन मनोहर सिंह चौहान मधुकर ने किया एवं आभार हिम्मत पडियार ने माना।

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