Uncategorized खेतिहर राज्य

फसल की नरवाई को जलाने पर प्रतिबंधित किया

धार | कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी आलोक कुमार सिंह ने दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा-144 के अन्तर्गत जनसामान्य के हित/जान-माल एवं लोक शांति को बनाए रखने के लिए धार जिले की राजस्व सीमा में फसल की नरवाई के उपयोग करने को प्रतिबंधित किए जाने का आदेश जारी किया है।
जिला दण्डाधिकारी श्री सिंह ने बताया कि जिले में खेती में आधुनिक मशीनों का उपयोग दिनों दिन बढ़ता ही जा रही है। जहाँ एक और इन आधुनिक मशीनों से किसानों का काम आसान हो गया है, लेकिन वही दूसरी और कही न कही इन मशीनों से नुकसान भी हो रहा है। फसल कटाने के लिए हार्वेस्टर मशीन का उपयोग किया जा रहा है। हार्वेस्टर से फसल कटाने में समय की काफी बचत होती है पर इसका दुष्परिणाम यह है कि फसल कटाई के बाद फसल के अवशेष खेत में रह जाते है। जैसे गेहूँ कटाई के बाद नरवाई खेत में रह जाती है, जिसे बाद में किसान जलाते है, जिससे पर्यावरण को तो भारी नुकसान होता है, साथ ही खेत की उर्वरक शक्ति भी कमजोर होती है। कृषि वैज्ञानिकों व अधिकारियों द्वारा हर वर्ष किसानों को यह समझाईश दी जाती है कि वे नरवाई को जलाए नही बल्कि और किसी अन्य साधनों से नष्ट करे, परन्तु अधिकांष किसान आज भी नरवाई को जलाकर ही नष्ट कर रहे है। हार्वेस्टर से फसल की कटाई करने व बाद में नरवाई को जलाने से पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। इस प्रकार नरवाई को जलाने के उपयोग की गतिविधियों पर रोकथाम की दृष्टि से इसके उपयोग को प्रतिबंधित किए जाने की आवश्यकता प्रतीत हो रही है।
धार जिले की सीमा में नरवाई जलाने के उपयोग से पर्यावरण प्रदूषित तथा स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव की स्थिति को रोकने व आमजन के जान-माल को आसन्न खतरा उत्पन्न होने की स्थिति पर अंकुष लगाए जाने हेतु यह आदेश जारी किया है। यह आदेश 15 मई तक प्रभावशील रहेगा तथा उक्त प्रभावशील अवधि में आदेश का उल्लंघन धरा 188 भारतीय दण्ड विधान के अन्तर्गत दण्डनीय अपराध की श्रेणी में आवेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *