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पत्रकारों को अब टोका-टोकी अभियान पुन:चलाना होगा- शरद जोशी

रतलाम । मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के वरिष्ठ मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष शरदजोशी ने एक बयान कहा कि पत्रकारों को कोराना संक्रमण के फैलाव पर नियन्त्रण के लिए एक बार फिर टोका टोकी अभियान चलाने की जरूरत है । कोराना महामारी का प्रकोप पुन:निरन्तर बड़ रहा है । लोग कम -ज्यादा आंकड़ों के आधार पर इसके प्रभाव का आंकलन कर महामारी को नजर अंदाज कर रहे हैं । जबकि सच यह कि कोराना संक्रमण के खतरे कम नहीं हूए हैं। फिजिकल डिस्टेन्स और मास्क को अपने जीवन और दिनचर्या का अंग बनाएं जाने के स्थान पर अधिकाशं लोग या यो कहें नब्बे प्रतिशत से भी अधिक लोग कोराना के खतरे को नजर अदांज कर रहे हैं । उसका एक कारण राजनैतिक मेले और प्रशासकीय आयोजनों में गाइडलाइन का पालन नहीं करना या नहीं होने देना या पालन नहीं करते हुए देखकर नहीं टोकना भी है। जो जितना प्रभावी है वह नियम का पालन करना नहीं चाहता ,उसका अहम आड़े आता है, जिसका अनुसरण दूसरे भी करते हैं। इसलिये नियमों की धज्जियां उडाई जारहीं हैं ।
आजकल सरकारें शासकीयसमितियों में पत्रकारों को शामिल नहीं करतीं । जबकि एक समय शासन की विभिन्न समितियों में पत्रकार संगठनों के प्रतिनिधियों और वरिष्ठ पत्रकारों को शामिल किया जाता था ताकि वे महत्वपूर्ण जन सुझाव दे सकें । लेकिन अफसर व नेता नहीं चाहते। यही कारण है समितियों मे विगत कई वर्षों से पत्रकार नही लिये जाते इसी कारण जनता की कई महत्वपूर्ण तकलीफे शासन तक नहीं पहुंच पाती। अफसर व नेता अखबारों की कतरने नहीं देखते और मोबाइल भी नही उठाते इसलिये जनता जनार्दन अब हम पत्रकारों को ही अपने दुख का साथी मानते हुए दुखड़ा रो जाते हैं। जनता पत्रकारों को ही अपना असली प्रतिनिधि मांने हुए है। जोशी ने कहा कि जनता के असली प्रतिनिधि होने के नाते नागरिकों के जीवन को बचाने की नैतिक जिम्मेदारी भी हमारी ही है। भले ही पत्रकारों को शासन ने कर्मवीर की श्रेणी में नही रखा फिर भी कोराना काल में जान की परवाह किये बिना वह मैदान में रिपोर्टिग करते रहे हैं और कर रहे हैं ।कई पत्रकार मौत के आगोश में चले गये ,कई अखबार प्रबंधन के दमन का शिकार हो गये फिर भी वे अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटे,और अभी भी डटे हुए हैं।
इसी कर्तव्य परायणता की दृष्टि से टोका-टोकी अभियान की जरूरत है ताकि लोगों का जीवन बचाया जा सके ,जो लोग मास्क नहीं लगाते उन्हैं टोका जाय, फिजिकल डिस्टेनस के महत्व को समझाया जाय ,उन्हैं बताया जाय कि जीवन की रक्षा और संक्रमण से बचने के लिए यह जरूरी है। शासन प्रशासन की मशीनरी लम्बे कोरानाकाल में थक चुकी है , स्वास्थ्य सेवाएं भी संतोष प्रद नजर नही आती जनता को ही अपने जीवन की रक्षा के उपाय करना होगें ।यही समझ उनको ,उनके परिवार को, निकटजनों के जीवन को बचा पायेंगी।
पत्रकारों के साथ ही आम नागरिकों से भी अपील हे कि टोका टोकी के इस अभियान में सहभागी बने और उन लोगों से भी आग्रह है कि यदि आपको मास्क लगाने का कोई निवेदन या आग्रह करें तो बुरा न माने। क्योंकि इसे कोराना संक्रमण से बचने और बचाने का जन अभियान बनाना है। यह आपके ओर हमारे प्राणों की रक्षा के लिए नितांत जरूरी है ।
जोशी ने बयान में मुख्यमंत्री जी से भी आग्रह किया है कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में कसावट लाई जाय तथा घोषणा के अनुरूप कोराना के संक्रमित मरीजों का इलाज सभी स्तर पर नि:शुल्क मिले ,इस बात की चिंता करते हूए जिला कलेक्टरों को निर्देश दिये जाय।प्रभार मंत्रियों की नियुक्तियां भी जल्दी हो ताकि जिलों में प्रशासनिक कसावट आ सके।साथ ही सरकारी डाक्टरों की निजी प्रेक्टिस पर भी इस महामारी में प्रतिबंध लगाया जाय ताकि सभी मरीजों को उपचार मिल सके।

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