मप्र, राज. में आज लहसुन में मंदी की चर्चा

मप्र, राज. में आज लहसुन में मंदी की चर्चा
(मोतीलाल बाफना)
रतलाम (11 दिस.)। मप्र की लहसुन मंडी में नीमच, पिपलियामंडी, मंदसौर, दलौदा, मनासा, जावरा, बड़ावदा, पिपलौदा, सैलाना, रतलाम, नामली, बड़नगर, बदनावर, उज्जैन, इंदौर, शाजापुर, सिहोर आदि मप्र की मंडियों में लहसुन की आवक कम रहने के बावजूद भी कहीं-कहीं पर 200 से 500 रुपए प्रति क्विंटल (100 किलो) के भाव में बाजार चाल ढीली रही। सप्ताह के प्रारंभ वाले दिन लहसुन मंे तेजी आने के बाद पुन: मंदी की चर्चा रही। कारण कि देश के बिक्री सेंटरों पर लहसुन में मंदी आने के बाद ग्राहकी कमजोर होने के कारण एकदम बाजार तेज करने पर ग्राहकी कम हो गई। इसकी वजह से आज राजस्थान की कुछ लहसुन मंडियों में भी आवक कम होने के बावजूद बाजार चाल ढीली रहने की चर्चा है। वैसे अब 20 दिसंबर के आसपास से देश में ठंडी (सर्दी) का दौर बढ़ जाएगा और पुरानी लहसुन जो ठंडी के कारण पोची होने का डर व्यापारियों व उत्पादक कृषकों को सताएगा। वैसे प्रदेश की कई मंडियों में कृषक पत्रकार ज्यादा हो गए और प्रत्येक मंडी से बाजार भाव के नाम से वीडियो यू ट्यूब पर बनाकर मंडियों की रिपोर्ट के साथ अपनी भी राय प्रकट करते देखे गए जो एक चर्चा का विषय है। इस साल लहसुन में रिकार्ड भाव स्थापित होने की चर्चा रही। किसी के कहने से व्यापार में तेजी-मंदी का वातावरण नहीं बनता। ऐसा लहसुन व्यापार के क्षेत्रों में चर्चा है। वैसे देशभर में प्रत्येक राज्य में कुछ मंडियों में कुछ व्यापारी तेजी-मंदी का वातावरण बनाने की चर्चा हमेशा करते रहते है। लहसुन की नई फसल जनवरी अंत या फरवरी माह में मप्र में प्रारंभ होने की पूरी संभावना है। जिस प्रकार वर्तमान समय में नई प्याज की फसल आने पर प्याज में मंदी का वातावरण बनने की संभावना बढ़ गई।
देश की लहसुन बिक्री की मंडियों में भी लहसुन में ग्राहकी कमजोर होने की चर्चा है। वहां क्वालिटी अनुसार माल 8000 से 20000 रुपए प्रति क्विंटल (पैकिंग अनुसार) भाव रहने की चर्चा है और इतने ऊंचे भाव पर हर व्यापारी माल उधार बेचने में घबराकर व्यापार कर रहा है।

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