लहसुन : उत्पादन क्षेत्रों की मंडियों में प्रतिदिन तेजी-मंदी

(मोतीलाल बाफना)
रतलाम। समाप्त सप्ताह में लहसुन उत्पादन राज्यों मप्र., उप्र., राज, गुज. आदि राज्यों में लहसुन में तेजी-मंदी का प्रतिदिन माहौल की चर्चा व्यापारी जगत में रह रही है। जिसके कारण बिक्री सेंटर के व्यापारी बड़ी असमंजस पूर्ण परिस्थिति में व्यापार कर रहे हैं। वहीं अब देश में बरसात के बाद ठंडी ने जोर पकड़ा है जिसके कारण जिन उत्पादक कृषक उत्पादकों के पास व्यापारी स्टाक स्टाकिस्टों के पास जो लहसुन पड़ा है वह ज्यादा ठंडी गिरने पर अपने माल को खराब होने की चिंता सता रही है। अभी समाप्त सप्ताह में प्रतिदिन की तेजी-मंदी से देश की बिक्री सेंटर की मंडियों मुंबई, िदल्ली, पुना, नागपुर, अकोला, बैंगलोर, हुबली, चैन्नई, वडुगापट्‌टी, कोयम्बटूर, मदुराई, कोलकाता, गोहाटी, बनारस, कानपुर, अहमदाबाद, सूरत, बिलासपुर, रायपुर, कटक, भुवनेश्वर, रांची, टाटा, जमशेदपुर, अमृतसर, लुधियाना, जालंधर, सोनीपत, पानीपत, करनाल, जयपुर, जोधपुर, बिकानेर, सहारनपुर, गया, पटना, समस्तीपुर, गुलाबबाग,गोरखपुर, मैसूर, निजामाबाद, खम्मम, ताड़ेपल्लीगुड्म. वरंगलम,रायगढ़, खड्गपुर, हुगली ( बंगाल), सिलीगुड़ी, सेलम, आदि मंडियों में इस माहौल से व्यापारी वर्ग और विशेषकर खेरची विक्रेता घबरा-घबराकर व्यापार कर रहा है। जिसके कारण देश के व्यापार पर भी असर गिर रहा है। बार-बार की इतने ऊंचे दामंों पर तेजी मंदी क माहौल बनाना लहसुन व्यापार क्षेत्र के लिए खतरनाक बन सकता है। या तो एक तरफा मुनाफा दिखेगा या फिर कुछ भी उठा-पटक हो सकती है। जिससे व्यापारी वर्ग परेशानी में आ सकता है। कुछ बड़े व्यापारी और बड़े स्टाकिस्ट उत्पादक कृषक भी इस तेजी मंदी के माहौल में सक्रिय होते नजर आ रहे हैं। वहीं उत्पादन क्षेत्रों की मंडियां यू ट्यूब आदि माध्यम से वीडियो रिकार्डिंग के माध्यम से लहसुन में जो तेजी मंदी की चर्चा रहती है जिसके कारण कई व्यापारी आपस में उलझते देखे गए। क्योंकि एक ग्रुप तेजी में तो एक ग्रुप मंदी के भावों की चर्चा करता है। वैसे एक चर्चा के मुताबिक तथा उत्पादक कृषकों से गांव-गांव में स्टाक को लेकर उत्पादक कृषकों से चर्चा होने पर यह बात दबे जुबान से उत्पादक कृषक करता पाया जाता है कि अभी भी गांव में किसानों के पास लहसुन स्टाक दबी जुबान से करते पाए जाते है जबकि वास्तविकता जब तक गांव में नए जाते तब तक वस्तुस्थिति साफ नहीं होती क्योंकि अब पुरानी लहसुन का व्यापार वर्तमान में जो माल आ रहा है उसमें लगातार एक महीने का व्यापार बाकी रहने की चर्चा क्योंकि नया लहसुन फरवरी माह में प्रारंभ हो सकता है और नए लहसुन की आवकें ज्यादा बढ़ने पर ही भाव पर निरंतर कंट्रोल होने की संभावना रहती है। देश के उत्पादन क्षेत्रों के राज्यों की मंडियों में लहसुन क्वालिट अनुसार 6000 से 14000 तक जनरल भाव प्रति क्विंटल व ऊंचे में 16000 के आसपास भी माल बिक्री होने की चर्चा है व देश की उत्पादन क्षेत्रों की मंडियों में लहसुुन ट्रक, भाड़े, खर्चे पड़ते मुताबिक क्वालिटी अनुसार 8000 से 20000 रुपए प्रति क्लिंटल तक पैकिंग अनुसार माल बिक्री की चर्चा है। एक चर्चा के मुताबिक वर्तमान कुछ समय से बिहार, बंगाल, असम, आदि लंबी दूरी के राज्यों में जो माल ट्रकों द्वारा लोडिंग हो रहा है उनमें कुछ स्थानों पर या तो ट्रक लुट जाएगा या माल बेचकर गायब हो जाएगा कि घटनाएं पिछले िदनों में चर्चा का विषय रही।

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