लाल मिर्च विदेश निर्यात हेतु एक्सपोर्ट में सर्टिफेकेशन के कारण एक्सपोर्ट प्रभावित हो सकता है

 

 (मोतीलाल बाफना)

रतलाम(6 दिसंबर 2018)। देश में लाल मिर्च की आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में जो पैदावार होती है उसमें से सुपर क्वालिटी व अन्य क्वालिटी की  लाल मिर्च मैक्सिको, चीन, वियतनाम, थाईलैंड, श्रीलंका, बांग्लादेश और अमेरिका सहित कई देशों की मांग पर मिर्च का निर्यात होता है। पिछले वर्ष देश में 4256 करोड़ की मिर्च का एक्सपोर्ट हुआ था और मसाला एक्सपोर्ट में लाल मिर्च का बहुत बड़ा योगदान है। अब लाल मिर्च में एक्सपोर्ट के प्लांट क्वारेनटाइन सर्टिफिकेशन एक्सपोर्ट की जरूरत से बड़ा नुकसान हो सकता है। और यह पहले मैक्सिको में ही लागू था। क्योंकि अब इसे 31 दिसंबर के बाद से अनिवार्य किया जा रहा है। जिसके कारण लाल मिर्च एक्सपोर्ट का व्यापार प्रभावित हो सकता है और मिर्च एक्सपोर्ट में कमी आ सकती है। वहीं जेब्स इंटरनेशनल के डायरेक्टर शैलेष शाह ने एक समाचार पत्र के लिए चर्चा में कहा कि सभी देशों को मिर्च एक्सपोर्ट के लिए सर्टिफिकेशन के लिए अनिवार्य लागू किया जाता है तो मिर्च व्यापार में एक बड़ी समस्या होगी। सरकार को इसे केवल मैक्सिको तक ही सीमित रखना चाहिए। ऑल इंडिया स्पाईसेज बोर्ड के चेयरमैन प्रकाश नंबूदरी ने बताया इस मामले में काफी देर हो सकती है और ये गैर जरूरी होगा क्योंकि मिर्च के कंसाइनेट्स के साथ स्पाईजेस बोर्ड का यह सर्टिफिकेट होता है। इसमें एफ्लेटॉक्सिन या सूडान रेड जैसे अन्य केमिकल मौजूद नहीं हैं। भारत से सबसे बड़ा मिर्च का खरीददार वियतनाम इसके बाद थाईलैंड, अमेरिका, श्रीलंका, मलेशिया आदि देश की खरीदी होती है और हाल ही वर्षों में तीखी मिर्च को चीन विशेष तौर पर पसंद करता है और चीन भी मिर्च निर्यात होने लग गई है। अभी आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में नई लाल मिर्च की फसल निकल रही है। वहां की मिर्च तेजा, बेड़गी व अन्य क्वालिटी की मिर्च एक्सपोर्ट में निर्यात होगी। वहीं मध्यप्रदेश की भी कुछ मिर्च क्वालिटी अनुसार निर्यात होने की चर्चा है। लेकिन मध्यप्रदेश मंे लाल मिर्च की फसल कमजोर होने की चर्चा भी है। हाल ही में बड़वानी, निमाड़, मध्यप्रदेश में इस साल जिले में 4877 हेक्टेयर में मिर्च की फसल लगाई गई है और एक हेक्टेयर में 1.6 टन मिर्च उत्पादन होने की चर्चा है। उद्यानिकी विभाग के अनुसार इसमें हाईब्रीड बीज का प्रयोग किया गया है। तथा इस मिर्च की जिले में जोरदार फसल हुई है और इस मिर्च की फसल में वायरस अटैक भी कम रहा है और इसकी पैदावारी अच्छी बैठने की चर्चा है जिसके कारण बड़वानी जिले के तलून गांव में किसानों के पास गुजरात, पूना, आदि राज्यों के व्यापारी वहां पहुंचकर किसानों से मिर्च की सीधी खरीदी कर लोडिंग करने की चर्चा है। एक जानकारी के मुताबिक चीन, वियतनाम, टैनबो रोड पोर्ट चालू कर दिया है। आधंप्रदेश और तेलंगाना की लाल मिर्च मार्केटों में नई लाल मिर्च क्वालिटी अनुसार लाल मिर्च तेजा, बीएफ एस-10, 334, डी.डी., एस-10, 344, 341, 273, नं. 5, संगेटा, 355 बीवायडी, 4884, 577, एस-10 और हाईब्रीड आदि क्वालिटी का माल एवं फटकी सभी वैरायटी की नई लाल मिर्च एवं एसी कोल्ड स्टोर का माल 3500 से 11000 रुपए प्रति क्विंटल तक वहां की मंडियों में व्यापार होने की चर्चा है। भारत से लाल मिर्च पावडर भी क्वालिटी अनुसार पैकिंग डिमांड अनुसार विदेशों में भी मांग अनुसार निर्यात होता है। एवं भारत में भी अब कई स्थानों पर लाल मिर्च पावडर आंध्रप्रदेश और कर्नाटक, तेलंगाना, गुजरात आदि स्थानों से मार्केट में बिक्री हेतु व्यापार होने की चर्चा है। बेड़गी के हावेरी जिले में लाल मिर्च की मार्केट लगती है जो सप्ताह में साप्ताहिक बाजार के रूप में चलती है। वहां पर नई लाल मिर्च की आवक प्रारंभ हो गई है। और वहां की मिर्च मसाला उद्योग एवं आइलोरिजन एक्सपोर्ट वाले भी खरीदी करते हैं। वहां पर फसल इस बार कुछ कमजोर बताई जा रही है।

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