आलोक वर्मा के खिलाफ नहीं हैं भ्रष्टाचार के ठोस सबूत- जस्टिस पटनायक

नई दिल्ली । टाइम्स ऑफ इंडिया से हुई बातचीत में जस्टिस पटनायक ने कहा, ‘एनेक्जर के साथ सीवीसी की रिपोर्ट 1,000 पन्नों से ज्यादा की है। मैं इस बात से हैरान हूं कि चयन समिति के सदस्यों ने इतने कम समय में सारे पन्ने कैसे पढ़ लिए, सबूतों को सही माना और यह फैसला लिया कि वर्मा को सीबीआई निदेशक के पद से हटा देना चाहिए। यह सही होता अगर चयन समिति सबूतों को सत्य मानने के लिए थोड़ा सा और समय लेती और फिर फैसला लेती।’
सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज जस्टिस एके पटनायक की देखरेख में सीवीसी ने सीबीआई के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की थी। उन्होंने रविवार को कहा कि वह चयन समिति की गति को देखकर हैरान हैं जिसने सीवीसी की भारी-भरकम रिपोर्ट को देखकर 24 घंटे से भी कम समय में वर्मा को पद से हटाने का फैसला लिया।
चयन समिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एके सीकरी शामिल थे। जहां पीएम मोदी और जस्टिस सीकरी का नजरिया इस बात को लेकर साफ था कि वर्मा को उनके पद से हटा देना चाहिए वहीं खड़गे इससे असहमत थे।

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