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खाद्य सामग्री बनाते और बेचते समय फूड सेफ्टी का कानूनों का पालन जरूरी- सांसद श्री लालवानी

आलू चिप्स तथा सेव-मिक्चर में मिलावट बर्दास्त नहीं की जायेगी- कलेक्टर श्री मनीष सिंह
इन्दौर | सांसद श्री शंकर लालवानी की अध्यक्षता में आज ब्रिलियंट कान्वेशन सेंटर में कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सांसद श्री शंकर लालवानी ने कहा कि खाद्य सामग्री बनाते और बेचते समय फूड सेफ्टी का कानूनों का पालन जरूरी है। सेव-नमकीन से जुड़े व्यापारी शासन के नियमों का पालन करें। घातक पदार्थों का सेव मिक्चर में इस्तेमाल न करें। जिला प्रशासन और व्यापारियों के बीच परस्पर संवाद जरूरी है। जिला प्रशासन द्वारा इसके लिये एक कमेटी का गठन किया जाये, जो व्यापरियों की शंका का समाधान करें। चिप्स और नमकीन निर्माण में अच्छी क्वालिटी का आलू, बेसन, और मसाला इस्तेमाल करना जरूरी है। मिक्चर सेव में इस्तेमाल होने वाला तेल तीन बार से ज्यादा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। बार-बार इस्तेमाल होने वाला तेल कैंसर कारक बनता है। मिक्चर में तेल के तीन बार इस्तेमाल करने के बाद तेल बेच देने चाहिये, उससे बॉयो डीजल बनता है। इस अवसर पर कलेक्टर श्री मनीष सिंह ने आलू, चिप्स, सेव, नमकीन व्यापारियों से कहा कि वे अपनी नैतिक जिम्मेदारी महसूस करें और सेव, नमकीन, चिप्स आदि में किसी भी तरह की मिलावट और गंदगी बर्दास्त नहीं की जायेगी। उन्होंने कहा कि 99 प्रतिशत व्यापारी ठीक ढंग से काम कर रहे हैं। किसी तरह की गैर कानूनी गतिविधि बर्दास्त नहीं की जायेगी। सेव मिक्चर के मामले में इंदौर को देश में नम्बर वन बनाना है। इस मुहिम में व्यापारियों का सहयोग जरूरी है। व्यापारीगण खतरनाक रसायनों और मिलावटी मसालों का उपयोग बंद करें। यह सब स्वास्थ्य के लिये हानिकारक है। व्यापार में नैतिकता का पुट जरूरी है। लाभ कमाने के लिये शार्टकट अपनाना उचित नहीं है। शार्टकट के चक्कर में लाखों लागों की जिंदगी में कैंसर जैसी घातक बीमारी हो रही हैं। माल शुद्ध हो और ब्रांडेड हो तो उसकी पहचान देश- विदेश में बनती है। इंदौर ब्रांड नमकीन का पूरी दुनिया में मांग होनी चाहिये। जिला प्रशासन द्वारा व्यापारियों की शंका समाधान के लिये कमेटी का गठन किया जायेगा।
इस अवसर पर खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञ श्री रामनाथ सूर्यवंशी ने कहा कि आलू चिप्स बनाने के लिये आलू को गरम पानी से धोना चाहिये । आलू को खुले खेत में सोलर डायर में सुखाना चाहिेये। मिक्चर फैक्ट्री के आस-पास साफ-सफाई होना चाहिये। व्यापारियों को घर में मसाला पीसना चाहिये। फैक्ट्री में शौचालय होना चाहिये और पेस्ट कंट्रोल करना चाहिये। चूहा और मक्खी नहीं होना चाहिये। फैक्ट्री में कच्चा माल और पक्का माल नीचे जमीन पर नहीं रखना चाहिये। फैक्ट्री हर साल रंगाई-पुताई होना चाहिये। फैक्ट्री के कर्मचारी ड्रेस में होना चाहिये। उनके सर में टोपी, पैर में जूते और सीने पर स्कार्फ होना जरूरी है।
इस अवसर पर खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञ सुश्री यशी श्रीवास्तव ने कहा कि खाद्य पदार्थों में मीठा सोड़ा इस्तेमाल किया जा सकता है। मिलावटी खाद्य पदार्थ पर कानूनी कार्यवाही की जाती है। हींग, मिर्ची, नमक, हल्दी सभी शुद्ध होना चाहिये। खाने-पीने की सामग्री जमीन पर रखने से उसमें नमी आ जाती है। फर्श पक्की होना चाहिये। बिना प्रशिक्षण के नमकीन व्यवसाय नहीं करना चाहिये। नमकीन व्यवसायों के लिये लायसेंस जरूरी है।
कार्यक्रम को अपर कलेक्टर श्री अभय बेड़ेकर और एसोशियएशन ऑफ इन्डस्ट्रीज के संयोजक श्री योगेश मेहता ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर एसोशियएशन ऑफ इन्डस्ट्रीज के अध्यक्ष श्री प्रमोद डफरिया और बड़े पैमाने पर सेव-मिक्चर के व्यापारी मौजूद थे।

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