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ब्रह्मविद्या का मार्गदर्शन करते हैं उपनिषद -स्वामी माधव प्रपन्नाचार्य

उज्जैन | वेद स्वयं रक्षित हैं। हम उनका संरक्षण कैसे कर सकते हैं। सांग वेद का अध्ययन हमारा सबका अनिवार्य कर्त्तव्य है। इससे वेद एवं सनातन परम्परा का संरक्षण होता है। मंत्र, संहिता, ब्राह्मण आदि वेद के अंग हैं। उपनिषद वेद का शिरोभाग है। वैदिक तत्त्व का सारभूत निर्णय उपनिषदों में वर्णित है। ये ब्रह्मविद्या का मार्गदर्शन करती हैं। उपनिषदों में स्त्री का सर्वोच्च सम्मान प्रतिपादित हुआ है। स्त्री-पुरुष दोनों के समन्वय के बिना जीवन संभव नहीं। शंकराचार्य ने भी स्त्री की महिमा का गान अपने साहित्य में किया है। गुरु, माता, पिता की सेवा जीवन की दशा और दिशा का निर्धारण करती है। अतः उपनिषदों का अध्ययन हम सब के लिए आवश्यक है। उक्त विचार रामानुजकोट के स्वामी माधव प्रपन्नाचार्य ने कालिदास संस्कृत अकादमी द्वारा आयोजित कल्पवल्ली के शुभारम्भ अवसर पर व्यक्त किये। वरिष्ठ विद्वान् डॉ.केदारनाथ शुक्ल ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि मानव के विकास की आधारभूमि वेद हैं। ऋग्वेद में प्रार्थना और यजुर्वेद में क्रिया है। मानवीय संवेदना, लोक-व्यवहार, राजधर्म, समाजधर्म आदि का अत्यन्त सूक्ष्म निर्देश वैदिक वाड्मय में उपदिष्ट है। उपनिषद से एकात्मवाद की प्रतिष्ठा होती है और समभाव की प्रेरणा मिलती है।
विशिष्ट अतिथि डॉ.मधुसूदन व्यास (मोडाशा, गुजरात) ने कहा कि वेद परिश्रम और पुरुषार्थ की ओर प्रेरित करते हैं। कर्मयोग, भक्तियोग और ज्ञानयोग जीवन जीने की कला सिखाते हैं। महात्मा गांधी ने कहा था कि ईशावास्योपनिषद् का एक मंत्र सुरक्षित रहेगा तो हम और हमारी संस्कृति, आचार-विचार सुरक्षित रख सकेंगे।
अतिथियों का स्वागत अकादमी की निदेशक श्रीमती प्रतिभा दवे तथा श्री अजय मेहता ने किया। इससे पूर्व उज्जैन की वैदिक परम्परा के आचार्यों पं.दिलीप कोरान्ने, पं.विश्वास करहाडकर, पं.प्रसाद वेरूलकर, पं.राजेश कोरान्ने, पं.जयनारायण शर्मा, पं.महेन्द्रदत्त शास्त्री, पं.सोहन भट्ट, पं.राहुल शर्मा, पं. धर्मेन्द्रकुमार शर्मा, पं.नागेश शर्मा, पं.स्वप्निल लाखे, पं.आकाश रावल, पं.पंकेश रामदासी, पं.आशुतोष शास्त्री, पं.सतीश शर्मा आदि सहित श्रीत्रिपुर सुन्दरी वेद-विद्यालय, श्री महाकालेश्वर वैदिक पाठशाला, श्री सनातन वेद-विद्यालय के बटुकों ने चारों वेदों से शाखास्वाध्याय प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार डॉ.सन्तोष पण्ड्या ने किया।

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