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अपहरण कर हत्या करने वाले 2 आरोपी को आजीवन कारावास

रतलाम । न्यायालय श्रीमान उमेश कुमार गुप्ता जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा आरोपीगण किशोर पिता रामचन्द्र पाटीदार उम्र 24 वर्ष नि. ग्राम डेलनपुरा जिला एवं रवि उर्फ प्रदीप पिता मोहनलाल प्रजापत उम्र 28 वर्ष नि. ग्राम पलसोड़ा जिला अपहरण कर हत्या करने वाले करने के मामले में आरोप सिद्ध होने पर आजीवन कारावास से दंडित किया है । उक्त मामले की पैरवी श्री सुशील कुमार जैन] डीडीपी व श्री अनिल कुमार बादल] डीपीओ रतलाम द्वारा की गई ।
घटना का संक्षिप्त विवरण
अभियोजन मीडिया सेल प्रभारी शिव मनावरे ने बताया कि दिनांक 12.02.2018 को फरियादी मांगीलाल पिता काशीराम पोरवाल उम्र 50 वर्ष नि. डेलनपुर रतलाम द्वारा थाना औ.क्षै. रतलाम पर उपस्थित होकर अपने पुत्र महेन्द्र पोरवाल उम्र 18 वर्ष की दिनांक 11.02.2018 से लापता होने की सूचना दी गई जिस पर से थाने पर क्रं. 14/18 पर गुमशुदगी दर्ज कर जॉच प्रारम्?भ की गई ।
महेन्द्र पोरवाल के पास दो फोन होकर उसमें आईडिया कम्पनी की सिम नं. 7747080775 व जिओ कंपनी मोबाईल फोन में सिम नं. 8319204390 थे जो घटना के बाद से ही बंद थे। दिनांक 14.02.2018 को महेन्द्र पोरवाल के मोबाईल फोन नं. 7747080775 से एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा मृतक के पिता मांगीलाल के मोबाईल पर फोन लगाकर पांच लाख रूपये फिरोती मांगी गई एवं फिरोती की रकम अदा न करने पर महेन्द्र की हत्या कर देने की धमकी दी गई। मांगीलाल द्वारा उक्?त जानकारी औद्योगिक क्षेत्र थाने पर दी गई। जिस पर से दिनांक 14.02.2018 को ही अपराध क्र. 87/18 धारा 364क भादवि का अपराध पंजीबद्ध कर प्रकरण अनुसंधान में लिया गया।
अनुसंधान के दौरान दिनांक 15.02.2018 को अपहत महेन्द्र पोरवाल के जिओ कम्पनी के मोबाईल फोन नं. 8319204390 अचानक चालु होने से उक्त नंबर की टावर लोकेशन के आधार पर उक्त मोबाईल नंबर को ट्रेस करना प्रारंभ किया गया जिसमें टावर लोकेशन के निरंतर बदलते रहने के आधार पर यह तथ्य पता चले की उक्त मोबाईल किसी वाहन में रखा हुआ। तब टावर लोकेशन का पीछा करते हुए उक्त वाहन को ट्रेस करने के लिये ए.बी. रोड चौकी ओझर जिला बड़वानी के पास हाईवे मार्ग पर चेकिंग की गई। जिसमें ट्रक क्र. एम.पी. 13 जी.ए. 5342 के पिछले हिस्से के अंदर से उक्त मोबाईल फोन जब्त किया गया। आरोपीगण द्वारा अपराध के साक्ष्य नष्ट करने एवं पुलिस को भ्रमित करने के उद्देश्य से षडय़ंत्रपूर्वक मोबाईल फोन को ट्रक में चालु कर फेंक दिया गया था।
अनुसंधान के दौरान दिनांक 16.02.2018 को फरियादी मांगीलाल एवं साक्षियों द्वारा किशोर पिता रामचन्द्र पाटीदार नि. डेलनपुर के साथ महेन्द्र को अंतिम बार देखना व उसी पर शंका जाहिर करना बताने पर तथा अपहृत महेन्द्र एवं किशोर के मध्य पूर्व विवाद होने की जानकारी भी प्राप्त होने पर उक्त दिनांक को ही पुलिस द्वारा संदेही किशोर पाटीदार को अभिरक्षा में लिया जाकर घटना के संबंध में पूछताछ की गई तो उसने योजनाबद्ध तरीके से अपने साथी रवि उर्फ प्रदीप प्रजापत नि. पलसोड़ा के साथ मिलकर रवि की मोटर सायकल से मृतक महेन्द्र पोरवाल को अपने साथ बैठाकर ग्राम जामथुन बनवारी लाल के खेत पर बने मकान के पास ले जाकर उसके साथ शराब पीना तथा मृतक महेन्द्र जब पूर्ण नशे में हो गया था तो तब उसकी मफलर से गला घोटकर हत्या कर देना तथा उसके शव में बड़ा पत्थर तार से बांधकर ग्राम जामथुन के कुंए में फेंक देना तथा मृतक के शव की शिनाख्त न हो सके इस उद्देश्य से मृतक के कपड़े निकाल कर झाडिय़ों में छुपा देने वाली जानकारी बतायी। उक्त जानकारी पर से आरोपी रवि को अभिरक्षा में लेकर उससे भी पूछताछ की गई तो उसने भी महेन्द्र के साथ उक्त घटना में शामिल होना बताया। अनुसंधान के दौरान उक्त तथ्य पता चलने पर धारा 302] 201] 34 भादवि का ईजाफा किया जाकर दोनो आरोपीगणों की निशादेही से ग्राम जामथून प्रकाश मईड़ा के कुंए से महेन्द्र पोरवाल के शव को] जो तार से बंधा हुआ था को बाहर निकाला गया तथा आरोपीगणों की निशादेही से ही घटनास्थल से शराब के खाली गिलास] क्वाटर आरोपी किशोर के घर से घटना में प्रयुप्त मफलर] आरोपी रवि के घर से मृतक का दूसरा मोबाईल फोन तथा घटना में प्रयुप्त मोटरसायकिल जब्त की गई। मृतक का पी.एम. करवाया जाकर मेडिकल साक्ष्य भी एकत्र की गई।
अनुसंधान उपरांत दोनों आरोपीगण के विरूद्ध अभियोग पत्र माननीय न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। विचारण उपरांत न्यायालय श्री उमेश कुमार गुप्ता जिला एवं सत्र न्यायाधीश रतलाम द्वारा अभियोजन साक्ष्य को प्रमाणित मानते हुए अपने निर्णय दिनांक 10.03.2021 को आरोपीगण किशोर पिता रामचन्द्र एवं रवि उर्फ प्रदीप पिता मोहनलाल को दोषसिद्ध पाते हुए धारा 302/34 भादवि (हत्या कारित करना) में कठोर आजीवन कारावास व 1000/- अर्थदण्ड] एवं धारा 364 भादवि (अपहरण करना) में 10 वर्ष कठोर कारावास व 1000/- अर्थदण्ड तथा धारा 201 भादवि (साक्ष्य छुपाना) में 07 वर्ष का कठोर कारावास व 1000/- अर्थदण्ड से दण्डित किया गया। उपरोक्त सभी सजायें साथ-साथ चलेगी।
प्रकरण में शासन की ओर से सफल पैरवी डीडीपी श्री सुशील कुमार जैन व डीपीओ श्री अनिल बादल द्वारा की गई।

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