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वध हेतु दो बैलो का अवैध परिवहन करने वाले आरोपी को 02 वर्ष का सश्रम कारावास

नीमच। डाॅ. मनोज कुमार गोयल, न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी, नीमच द्वारा वध हेतु दो बैलो का अवैध परिवहन करने वाले आरोपी अमित उर्फ गोलू पिता श्यामलाल अहीर, उम्र-24 वर्ष, निवासी-ग्राम कंचन नगर ग्वालटोली, जिला नीमच को म.प्र. गोवंध प्रतिषेध अधिनियम, 2004 की धारा 6/9 में 01 वर्ष का सश्रम कारावास व 5,000रू. जुर्माना, म.प्र. कृषि पशु परिरक्षण अधिनियम 1969 की धारा 10 में 01 वर्ष का सश्रम कारावास व 1,000रू. जुर्माना व मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 192क में 2,000रू. जुर्माने से, इस प्रकार कुल 2 वर्ष के सश्रम कारावास व 8,000रू. जुर्माने से दण्डित किया।
श्री विपिन मण्डलोई, एडीपीओ द्वारा घटना की जानकारी देते हुुए बताया कि घटना लगभग 7 वर्ष पुरानी होकर दिनांक 26.06.2014 की हैं। उक्त दिनांक को पुलिस थाना जीरन में पदस्थ ए.एस.आई. प्रतापसिंह पंवार को सुबह के लगभग 8 बजे मुखबिर सूचना मिली की हर्कियाखाल फंटा हाईवे पर एक व्यक्ति पिकअप वाहन से बैलो का वध किये जाने हेतु अवैध रूप से धूलिया (महाराष्ट्र) ले जाने वाला हैं। मुखबिर सूचना विश्वसनीय होने से हर्कियाखाल फंटे की घेराबंदी की गई, जहाॅ से मुखबिर द्वारा बताया हुआ पिकअप वाहन आता हुआ दिखा, जिसको रोककर उसकी तलाशी लिये जाने पर वाहन के पिछले भाग में दो लाल रंग के बैलो को क्रूरतापूर्वक रस्सी से बाँधा हुआ था, जिसको अवैध रूप से कटने हेतु धुलिया (महाराष्ट्र) ले जाया जा रहा था। पुलिस द्वारा आरोपी ड्रायवर को गिरफ्तार करते हुए वाहन व पशुओं को जप्तकर आरोपी के विरूद्ध पुलिस थाना जीरन में अपराध क्रमांक 151/14, म.प्र. गोवंध प्रतिषेध अधिनियम, 2004 की धारा 6/9, म.प्र. कृषि पशु परिरक्षण अधिनियम 1969 की धारा 10 व मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 192क के अंतर्गत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया। पुलिस जीरन द्वारा शेष विवेचना पूर्ण कर अभियोग पत्र माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
न्यायालय में विचारण के दौरान अभियोजन द्वारा जप्तीकर्ता अधिकारी, विवेचक सहित सभी महत्वपूर्ण साक्षीयों के बयान कराकर वध हेतु पशुओं के अवैध परिवहन किये जाने के अपराध को प्रमाणित कराकर आरोपी को कठोर दण्ड से दण्डित किये जाने का निवेदन किया गया। जिस पर से माननीय न्यायालय ने आरोपी द्वारा किया गया कृत्य गंभीर, समाज पर बुरा प्रभाव पड़ने वाला व कानून व्यवस्था को बिगाड़ने वाला मानते हुए आरोपी को म.प्र. गोवंध प्रतिषेध अधिनियम, 2004 की धारा 6/9 में 01 वर्ष का सश्रम कारावास व 5,000रू. जुर्माना, म.प्र. कृषि पशु परिरक्षण अधिनियम 1969 की धारा 10 में 01 वर्ष का सश्रम कारावास व 1,000रू. जुर्माना व मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 192क में 2,000रू. जुर्माने से, इस प्रकार कुल 2 वर्ष के सश्रम कारावास व 8,000रू. जुर्माने से दण्डित किया गया। न्यायालय में शासन की ओर से पैरवी श्री विपिन मण्डलोई, एडीपीओ द्वारा की गई।

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